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तन्हाई में शाम गुजरना ठीक नही

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#ग़ज़ल  तन्हाई में शाम गुजरना ठीक नही। महफ़िल में भी दर्द उभरना ठीक नही। सच्चे वादे मजबूती हैं रिश्तों की , करके वादा रोज मुकरना ठीक नही। हिम्मत से हालात बदलते देखा है,  कैसी भी मुश्किल हो डरना ठीक नही । तेरे आने की राहें देखी हमने, उम्मीदों का रोज बिखरना ठीक नही । सीधे सच्चे लोग तमाशा बन जाते, हमदर्दी के दौर गुजरना ठीक नही । नाजुक दिल ये पत्थर इसको मत समझो, मत उलझो जज्बातों से वरना ठीक नही । कहलाना इंसान हमारा भी हक़ है, खोकर के सम्मान बिखरना ठीक नही । Nirupama Mishra  #तन्हाई #महफिल #ग़ज़ल #वादे #उम्मीद #हमदर्दी #जज्बात #हक़

जलता दीपक कब घबराया रातों से

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धीरज रखना मत घबराना बातों से । जलता दीपक कब घबराया रातों से । टूटे जब जब हम बिखरे हैं टुकड़ों में, एक रहे तो उबरे झंझावातों से । उगते सूरज को ढक लेते हैं बादल, चमके नभ में कब घबराता घातों सें।  मंजिल को पाना आसान नही होता,  चलते रहना बचना है आघातों से । बहलावों में खोकर खुद को मत खोना,  उलझा देंगे लोग तुम्हें भी बातों से । निरुपमा मिश्रा 'नीरू'

बाग के झूले कहाँ है खो गई पुरवाइयां

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बाग के झूले कहाँ हैं खो गई पुरवाइयां। याद आते हैं बगीचे और वो अमराइयां । खो गये हैं मायने होने के अपने आप के, अब नही मिलती वफायें अब कहाँ सच्चाइयां । मुद्दतों से आस में तड़पा किया है ये चमन, फूल बगिया में खिलेंगे और होंगी तितलियां । एकतरफा फैसला होता नही है कारगर, मामला दोनों तरफ का देख लेते अर्जियां । दोष सारे दूसरों के और हम निर्दोष हैं,  इस तरह की सोच ने रिश्तों में दी हैं दूरियां । दूर होकर भी हमारी. रूह से पैवस्त है, दे रही मन को सुकूं अपनी यही नजदीकियां । देख मौसम का बदलना तिलमिलाये लोग हैं,  हो रहा एहसास अब ये क्या हुई हैं गल्तियां ।

बात करने का बहाना चाहते हैं...

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 फिर मुझे वो आजमाना चाहते हैं । बात करने का बहाना चाहते हैं । चंद लम्हों में कहाँ ये खत्म होगी, बात दिल की वो सुनाना चाहते हैं । हम इशारे भी समझ लेते हैं उनके, और वो होठों से जताना  चाहते हैं । ख्वाहिशें भी आग का दरिया बनी हैं,  तैर  करके   पार  जाना  चाहते  हैं । खुश हुई ये शाम भी मिलकर किसी से, शब  सितारे  गुनगुनाना   चाहते हैं । निरुपमा मिश्रा 'नीरू' 

कितनी बातें लिख डाली

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22 22 22 22 22 2  लिखते लिखते कितनी बातें लिख डाली ।  गुमसुम आंखों में बरसातें लिख डाली । कुछ बातें तो लिखना भी आसान नही, लेकिन जीत की जिद में मातें लिख डाली। दिन भर सूरज था अपनी परछाई थी, तन्हा बीती कितनी रातें लिख डाली ।  मुश्किल है मुस्कान सजाना होठों पर,  सहनी हैं कितनी आघातें लिख डाली । गर्दिश में रस्ते खो जायें अफसोस नही, हमको हासिल जो सौगातें लिख डाली । अफसाने लिखने वाले भी क्या जाने,  इसकी उसकी सबकी बातें लिख डाली । बाहर से यूं तो सब अपने लगते हैं,  मन में लेकिन कितनी घातें लिख डाली । निरुपमा मिश्रा 'नीरू' 

कोई सैलाब दफ़्न दिल में तेरे

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2212 1212 221 कोई   रिश्ता   यक़ीन  जोड़ा जाये । गुल  किसी  शाख़  से न तोड़ा जाये। उसको फु़रसत  नही  है अपने ग़म से, ध्यान उसका कहीं और भी मोड़ा जाये । ज़िंदगी   रेस   की   तरह  लगती  है , साथ किसको लें किसको छोड़ा जाये । ख़ाक   हो   दिल   लगाव  छूटे अगर , सबसे    पहले   गु़रूर   छोड़ा   जाये । एक   सैलाब   दफ़्न   दिल   में   तेरे, लफ्ज़  की  शक्ल  में  निचोड़ा  जाये।

पेंड़ धरती पर

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ये डेरे पक्षियों के पेंड़ धरती पर । दे राहत गर्मियों में पेंड़ धरती पर। बुलाकर बारिशों को इस ज़मीं पर, सहेजेंगे नमी को पेंड़ धरती पर। ये देते प्राणवायु उपहार जीवन का, बचायेंगे ये सांसें पेंड़ धरती पर । ज़हर घुलता हवा में बांझ धरती है, पुकारे जिंदगी को पेंड़ धरती पर। लगाकर पेंड़ गुलशन ताप होगा कम, निखारेंगे ये दुनिया पेंड़ धरती पर। 

शान अपनी सभी तो दिखाते रहे

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                 शान अपनी सभी तो दिखाते रहे                  दर्द भी क्या कहें गुनगुनाते रहे                  आपके प्यार में हम बेहया हो गये                  प्यार भी क्या ज़हर सब पिलाते रहे                  आपने दे दिया ग़म यही है बहुत                  और क्या दे सके मुस्कराते रहे बात कुछ भी नहीं और बातें बहुत आप भी तो कहानी सुनाते रहे हम रहे राह में चल दिये दो कदम आप मंजिल बहुत पास आते रहे --- नीरु ( निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी)

रंग में रंग मिलता गया

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आपके प्यार में खो गये इश्क में रतजगे हो गये दर्द भूले सभी खो गये प्यार के काफिले हो गये ठीक था होंठ चुप ही रहे बात से जलजले हो गये बात में बात जुड़ती गई बात से फलसफ़े हो गये  रं...

अभी राज़ अपना बताया नही है

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अभी प्यार हमने जताया नही है अभी हाल दिल का बताया नही है बहुत ख्वाब देखा निगाहों से ओझल अभी आँख में सब सजाया नही है रुके जो नही है हमारी निशानी अभी चाल अपनी दिखाया नही है कई कर...

तू खुदा हो गया

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देखते आपको इक नशा हो गया प्यार दिल ने किया तू खुदा हो गया आजकल रात से बात होने लगी फिर सुबह का पता बावरा हो गया हम कहें क्या इसी सोच में रह गये प्यार की इक अदा सांवरा हो गया इक हमारे नही हो सकेंगे वही दिल हमारा किसी पर फिदा हो गया बात कुछ खास हममें कहीं तो रही दूर होते हुए सिलसिला हो गया सामने आप हों तो खुशी मिल गई दूर जाते हुए दिल अनमना हो गया देखिये गौर से "नीरु"  तस्वीर में दर्द देेेकर वही फिर दवा हो गया  ---- नीरु ( निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी)

चिराग़

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साथ दिल के चिराग़ जलते हैं ये हुनर भी कमाल रखते हैं   रात काली रही किसे है ग़म रोशनी का वजूद रखते हैं दे गया ख्वाब फिर नया कोई प्यार के रंग खास सजते हैं हो सके तो वहीं नज़र रखन...

हौसला पतवार है

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वक्त के आगे कहाँ चलता किसी का वार है जो नही समझे समय पर तो गया वो हार है कौन कितना है सही कोई कहे कैसे भला हम सही हैं तुम गलत हो बस यही तकरार है चाल चलने में लगी कैसी दिमागी  साजिशें दिल बहुत मासूम धोखा  यार बेशुमार है कह रहा है कौन अपने आप से ही बस यही पास आयेगा किनारा हौसला  पतवार है बीत जायेगा  समय जो खार बनकर है मिला प्यार है जब साथ अपने कब खुशी दुश्वार है ------- नीरु 'निरुपमा मिश्रा  त्रिवेदी'

राह परछाई नही

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साथ चलती किसके कोई राह परछाई नही कौन जानें मुश्किलें कब साथ में आई नही दे गया कोई कली की आँख में सपने नये आस में वो शाम तक यूँ ही तो मुरझाई नही मीत हैं सुख के सभी कोई कभी दुःख में नही भीड़ में रहते हुए क्या साथ तन्हाई नही भूख ने छीना यहाँ  ईमान भी इंसान का शर्म आती है मगर मजबूर टिक पाई नही बदलते मौसम कहाँ तुमको कहा हमने कभी देखने को असलियत तो पास बीनाई नही ------ निरुपमा मिश्रा " नीरू"

अगर इजाजत हो

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फिर नये ख्वाब सजा दूँ अगर इजाजत हो तुम्हीं को तुमसे मिला दूँ अगर इजाजत हो हम ठहर जायें अगर  वक्त ठहरता ही नही कश्मकश  दिल की मिटा दूँ अगर इजाजत हो   बात ऐसी भी क्या कि झिझकती है नज़र हया की चिलमन उठा दूँ अगर इजाजत हो थाम कर दिल अपना कब तलक रहियेगा अब इसे अपना बना लूँ अगर इजाजत हो रुको सितारों जरा रात अभी तो ठहरी है प्यार की रस्म निभा दूँ अगर इजाजत हो ------ निरुपमा मिश्रा "नीरु "

दूर हमसे घर हमारा हो गया

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ख्वाब में उसका नजारा हो गया डूबते को भी सहारा हो गया कुछ रही होंगी जरूरी ख्वाहिशें वो न था दुश्मन हमारा हो गया राह  में मिलता न जाने कौन ये आम भी तो खास प्यारा हो गया आप भी देख...

गुनाहों के मसीहा

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नज़र वो तो नजारों से चुरायें हैं लगी कहने कहानी ये हवायें हैं  छुपा कर दिल तराने वो सुनायेगा जिसे सबने जमाने से भुलायें हैं  रही हलचल यहाँ सच बात पर ही तो निगाहें भी न कहती य...