तन्हाई में शाम गुजरना ठीक नही
#ग़ज़ल तन्हाई में शाम गुजरना ठीक नही। महफ़िल में भी दर्द उभरना ठीक नही। सच्चे वादे मजबूती हैं रिश्तों की , करके वादा रोज मुकरना ठीक नही। हिम्मत से हालात बदलते देखा है, कैसी भी मुश्किल हो डरना ठीक नही । तेरे आने की राहें देखी हमने, उम्मीदों का रोज बिखरना ठीक नही । सीधे सच्चे लोग तमाशा बन जाते, हमदर्दी के दौर गुजरना ठीक नही । नाजुक दिल ये पत्थर इसको मत समझो, मत उलझो जज्बातों से वरना ठीक नही । कहलाना इंसान हमारा भी हक़ है, खोकर के सम्मान बिखरना ठीक नही । Nirupama Mishra #तन्हाई #महफिल #ग़ज़ल #वादे #उम्मीद #हमदर्दी #जज्बात #हक़