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वृक्षारोपण, एक पौधा एक संकल्प ( दोहे )

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काश धरा से वृक्ष भी,होते नही विलीन। प्राणवायु मिलती हमें, बगैर किसी मशीन।।  अब तो कर लें वृक्ष की, हम दिल से परवाह। साँसों के मुहताज क्यों, चलता रहे प्रवाह।।  वृक्षारोपण से करे,संरक्षित हम प्राण। संकट साँसों पर नही,सबका ही कल्याण।। जन जीवन रक्षक यही, जंगल सलिल जमीन। संभव प्रकृति विनाश से , जन जीव प्राणहीन।  जल संरक्षण के लिए, करिये सभी प्रयास। जल बिन जीवन है नही, अमिट रहेगी प्यास।।

कभी ठहरता ही नही

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कभी ठहरता ही नही, मन में एक विचार। मन के इस भटकाव से, तन भी है बीमार।। ताकत दौलत का नशा, अजब लगाये रोग। इक दूजे की होड़ में , करें दिखावा लोग।। अपने मतलब की यहाँ, सबको होती चाह। अपना ही गुणगान है,कब किसकी परवाह।। सच्ची बातों पर यहां, पल में जाते रूठ।। सच उन्हें तीखा लगे,जिनको भाये झूठ।। तपन द्वेष की बढ़ चली,नेह नीर की आस। तन पर छाया धूप की,मन धरती की प्यास।। निरुपमा मिश्रा 'नीरू' 

पलायन

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मीलों तक पैदल चले, सभी उपेक्षित लोग| प्रकोप को भी रोकना,बड़ा भयानक रोग|| मजदूरी मिलती नही,मिला नही है काम| पापी पेट न मानता,कैसे हो आराम|| निरुपमा मिश्रा नीरू

कोरोना का कहर

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दोहे- कोरोना का कहर कोरोना के खौफ से, सहमा हुआ समाज | वैज्ञानिक हर देश के, खोजें अभी इलाज|| ज्वर,खाँसी, सिरदर्द भी,लगे कष्टमय साँस| अविलंब जाँच के लिए, रहें चिकित्सक पास|| बीमारी के नाम से , मत रहिये भयभीत| भेद तीन पहचानिये,ज्वर,खाँसी अरु शीत|| रखें संक्रमित व्यक्ति से, खुद को निश्चित दूर| अपने मुख अरु नासिका, ढकिये आप जरूर|| अभी रोग उपचार का, नही सटीक साधन| सही नियम ,आचार का, करें पूरा पालन|| करबद्ध अभिवादन से,संयमित हो मिलाप| व्यक्तिगत संबंधों में, सतर्क रहिये आप|| संक्रमण के प्रसार से,करिये सभी बचाव| साफ रखिये हाथ सदा, अपनाइये सुझाव|| जनसमूह ज्यादा जहाँ, रहें वहाँ से दूर| व्यर्थ भ्रमण करिये नही, रखिये ध्यान जरूर|| निरुपमा मिश्रा 'नीरू'

दोहे

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विपदा के दिन भी भले, रहते हैं दिन चार हित- अनहित का भेद दें, सिखायें जगत सार अंखियन की आशायें , लखे सहज मनमीत हृदय सुनाये क्यों वही, विरह के विगत गीत मन में रही व्याकुलता , अब अवलो...