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बरसात के मौसम में खाइए काकोरा की सब्जी

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बरसात है तो ककोरा की सब्ज़ी खायें ककोरा की सब्जी  बरसात के मौसम में आती है औऱ यह जंगली सब्ज़ी  है,खुद पैदा होती है।इसकी खेती नहीं होती न खेती की जा सकती है।  इस कांटेदार दिखने वाली सब्जी को लोग आम बोलचाल की भाषा में ककोरा, कंटोला या ककोड़ा के नाम से जानते हैं. ककोरा की सब्जी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है और ये कई सेहत संबंधी समस्याओं को दूर करने में कारगर है. इस सब्जी को खाने के अलावा औषधी की तरह नुस्खों में भी इस्तेमाल किया जाता है. ककोरा को गुणों की खान माना गया है।  इसके न्यूट्रिएंट्स की बात करें तो इसमें प्रोटीन, विटामिन ए, सी, के, बी-1, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6, विटामिन डी, और जिंक, कॉपर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं.  ककोरा की सब्जी लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली सब्जी है इसलिए यह उन डायबिटिक लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनका ब्लड शुगर हाई हो जाता है. इसके अलावा बीपी कंट्रोल करने में भी ककोरा की सब्जी कारगर मानी गई है. आज के वक्त में बच्चों से लेकर यंगस्टर्स और व्यस्क लोग भी बड़ी संख्या में मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं. यह एक लो कैलोरी सब्...

प्रकृति का चमत्कार.. अमरबेल लता

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अमरबेल अमर बेल एक पराश्रयी (दूसरों पर निर्भर) लता है, जो प्रकृति का चमत्कार ही कहा जा सकता है। बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उससे रस चूसने वाले सूत्र के माध्यम से प्राप्त कर लेती है। अमर बेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक तथा नहीं के बराबर होते हैं। अमर बेल पर सर्द ऋतु में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। बीज राई के समान हल्के पीले रंग के होते हैं। अमर बेल बसन्त ऋतु (जनवरी-फरवरी) और ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती है। रंग : अमर बेल का रंग पीला होता है। स्वाद : इसका स्वाद चरपरा और कषैला होता है। स्वभाव : अमर बेल गर्म एवं रूखी प्रकृति की है। इस लता के सभी भागों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। मात्रा (खुराक) : अमर बेल को लभगभ 20 ग्राम की मात्रा में प्रयोग कर सकते हैं। गुण : आकाश बेल ग्राही, कड़वी, आंखों के रोगों को नाश करने वाली, आंखों की जलन को दूर करने वाली तथा पित्त कफ और आमवात को नाश करने वाली है। यह वीर्य को बढ़ाने वाली रसायन ...

नींद की कमी का दिमाग पर असर... आइए जानें।

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World Brain 🧠 Day 22 जुलाई 2025 पर विशेष रात की नींद हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इस दौरान दिमाग भी खुद को आराम देता है, रिपेयर करता है और दिनभर की मेमोरी को स्टोर करता है। हालांकि आजकल की लाइफस्टाइल में लोग रात को देर तक जागते हैं । लेकिन क्या आप जानते हैं नींद की कमी सीधे तौर पर हमारे दिमाग को नुकसान (Sleep and Brain Health) पहुंचा सकती है? इसलिए ब्रेन हेल्थ डे (World Brain Day 2025) के मौके पर हमने डॉ. (प्रो.) कुनाल बहरानी ( क्लीनिकल डायरेक्टर- न्यूरोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल फरीदाबाद) से यह जाना कि जब हम पूरी नींद नही लेते तो इसका हमारे दिमाग पर क्या असर पड़ता है। आइए जानें इस बारे में। 1: याददाश्त और सीखने की क्षमता पर असर नींद के दौरान हमारा दिमाग दिनभर की एक्टिविटीज और सीखी गई चीजों को ऑर्गेनाइज करता है। डीप स्लीप और REM स्लीप साइकिल के दौरान दिमाग नई जानकारी को लंबे समय तक याद रखने के लिए स्टोर करता है। अगर नींद पूरी नहीं होती, तो यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है और नई चीजें सीखने में मुश्किल होती है। 2: फोकस करने और फैसले लेने की क्...

अश्वगंधा... एक चमत्कारिक औषधि

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अश्वगंधा एक चमत्कारिक दवा कैसे करें इसका सेवन... अश्वगंधा चूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जो आपकी सेहत के लिए बहुआयामी फायदों का खजाना है।  इसे सही तरीके से सेवन करने से न केवल आपका शारीरिक बल बढ़ेगा, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होगी। आइए विस्तार से जानें कि अश्वगंधा चूर्ण का सेवन कैसे और किन तरीकों से किया जा सकता है। 1 पानी के साथ (Water Method) कैसे करें सेवन....... 1 चम्मच (लगभग 5 ग्राम) अश्वगंधा चूर्ण लें। इसे गुनगुने पानी के साथ मिलाकर रोज़ाना सुबह और रात को सेवन करें। फायदे:........ तनाव और चिंता से राहत मिलती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। 2 दूध के साथ (Milk Method) कैसे करें सेवन? एक गिलास गर्म दूध लें। उसमें 1 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण मिलाएं। स्वाद के लिए थोड़ा सा शहद या गुड़ डाल सकते हैं। ♦️फायदे:....... यह आपकी हड्डियों को मजबूत करता है। शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। मांसपेशियों की मजबूती बढ़ती है। विशेष टिप सोने से पहले सेवन करें, इससे गहरी और शांत नींद आती है। 3 घी के साथ (Ghee Method) कैसे करें सेवन...... 1/2 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण लें।...

बारिश में नहाने के फायदे और नुकसान... जानिए डॉक्टर की राय।

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बारिश में नहाने के फायदे और नुकसान, जानिए डॉक्टर की राय...  बारिश में नहाना कई लोगों को अच्छा लगता है. जैसे ही बूंदें गिरना शुरू होती हैं, लोग बाहर निकलकर बरसात का आनंद लेना शुरू कर देते हैं. अधिकतर लोग मानते हैं कि बारिश का पानी साफ होता है और उससे नहाने से दिक्कत नहीं है. हालांकि बारिश में नहाने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि लोगों को बारिश में नहाना चाहिए या नहीं? अगर कोई बारिश में नहाता है, तो उससे सेहत को क्या नुकसान हो सकता है? अगर आपके मन में भी ये सवाल आ रहे हैं, तो इन सभी के जवाब डॉक्टर से जानने की कोशिश करते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने बताया कि बारिश में नहा सकते हैं,बारिश में कभी-कभार नहाने से कोई नुकसान नहीं है. लेकिन उसके बाद घर पर साफ पानी से नहाना बेहद जरूरी होता है. दरअसल बारिश के पानी में कई बार प्रदूषण और बैक्टीरिया हो सकते हैं, जिससे नहाने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. बारिश में नहाते वक्त धूल, मिट्टी और गंदगी की चपेट में आ गए, तो स्किन पर...

नींबू की चाय के फायदे

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नींबू की चाय कई बीमारियों को दूर रखती है, नियमित सेवन से होते हैं जबरदस्त फायदे...। नींबू-चाय दूध वाली चाय पीना सेहत के लिए हानिकारक है साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि आपको दिन में दो कप से ज़्यादा इस चाय का सेवन नहीं करना चाहिए...। लेकिन,नींबू की चाय पीने से आपको कोई परेशानी नहीं है क्योंकि नियमित रूप से नींबू की चाय पीने से आपकी सेहत अच्छी रहती है. आइए जानें नींबू की चाय पीने के क्या-क्या फायदे हैं....। स्वास्थ्य संबंधी कई शिकायतों के लिए उपयोगी! हाल ही में, कई लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं. इसलिए, व्यायाम और आहार ने स्वास्थ्य में अत्यधिक महत्व प्राप्त कर लिया है. यह कहना गलत नहीं होगा कि चाय भारतीयों की कमज़ोरी है हालाँकि पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है कि चाय और कॉफ़ी सेहत के लिए अच्छी नहीं हैं. फिर कई लोगों ने नियमित चाय पीना बंद कर दिया. हालाँकि इससे ब्लैक टी, लेमन टी/लाइम टी जैसी चीज़ों की माँग बढ़ गई.  नींबू की चाय बनाना आसान है और यह शरीर को साफ करने के काम आती है। अब इसमें कौन से तत्व हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं? इस बारे में बहु...

पांच प्राण एवं उप प्राण व्याख्या

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पाँच प्राण एवं उप प्राण व्याख्या 〰️〰️🔸〰️🔸〰️🔸 प्राणतत्व एक है, पर प्राणी के शरीर में उसकी क्रियाशीलता के आधार पर कई भागों में विभक्त किया गया है। शरीर के प्रमुख अवयव मांस-पेशियों से बने हैं, पर संगठन की भिन्नता के कारण उनके आकार-प्रकार में भिन्नता पाई जाती है। इसी आधार पर उनका नामकरण एवं विवेचन भी पृथक्-पृथक् होता है। मानवी-काया में प्राण-शक्ति को भी विभिन्न उत्तरदायित्व निबाहने पड़ती हैं उन्हीं आधार पर उनके नामकरण भी अलग हैं और गुण धर्म की भिन्नता भी बताई जाती है। इस पृथकता के मूल में एकता विद्यमान है। प्राण अनेक नहीं हैं। उसके विभिन्न प्रयोजनों में व्यवहार पद्धति पृथक है। बिजली एक है, पर उनके व्यवहार विभिन्न यन्त्रों में भिन्न प्रकार के होते हैं। हीटर, कूलर, पंखा, प्रकाश, पिसाई आदि करते समय उसकी शक्ति एवं प्रकृति भिन्न लगती है। उपयोग आदि प्रयोजन को देखते हुए भिन्नता अनुभव की जा सकती है तो भी जानने वाले जानते हैं कि यह सब एक ही विद्युत शक्ति के बहुमुखी क्रिया-कलाप हैं। प्राण-शक्ति के सम्बन्ध में भी यही बात कही जा सकती है। शास्त्रकारों ने उसे कई भागों में विभाजित किया है, कई नाम दिये...

जामुन : आश्चर्यजनक ये कि इस फल की वजह से किसी देश का नामकरण हुआ, आइए जानते हैं जामुन के फायदे...

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जामुन : आश्चर्य की बात तो है कि किसी फल के वजह से किसी देश का नामकरण किया गया  भारत को जम्बू द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम जामुन के वजह से है। आश्चर्य की बात तो है कि किसी फल के वजह से किसी देश का नामकरण किया गया! दरअसल जामुन के कई नाम हैं और उन्हीं में से एक नाम है जम्बू। भारत में जामुन की बहुतायत रही है। हमारे देश में इसके पेड़ों की संख्या लाखों-करोड़ों में है और शायद इसी कारण से यह फल हमारे देश की पहचान बन गया। भारतीय माइथोलॉजी के दो प्रमुख केंद्र रामायण और महाभारत में भी यह विशेष पात्र रहा है। भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में मुख्य रूप से जामुन का ही सेवन किया था, वहीं श्री कृष्णा के शरीर के रंग को ही जामुनी कहा गया है। संस्कृत के श्लोकों में अक्सर इस नाम का उच्चारण आता है। जामुन विशुद्ध रूप से भारतीय फल है। भारत का हर गली-मोहल्ला इसके स्वाद से परिचित है। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामु...

ककड़ी खाने के फायदे

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ककड़ी के फ़ायदे कच्ची ककड़ी में आयोडीन पाया जाता है। ककड़ी बेल पर लगने वाला फल है। गर्मी में पैदा होने वाली ककड़ी स्वास्थ्यवर्ध्दक तथा वर्षा व शरद ऋतु की ककड़ी रोगकारक मानी जाती है। ककड़ी स्वाद में मधुर, मूत्रकारक, वातकारक, स्वादिष्ट तथा पित्त का शमन करने वाली होती है।  उल्टी, जलन, थकान, प्यास, रक्तविकार, मधुमेह में ककड़ी फ़ायदेमंद हैं। ककड़ी के अत्यधिक सेवन से अजीर्ण होने की शंका रहती है, परन्तु भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करने से अजीर्ण का शमन होता है।  ककड़ी की ही प्रजाति खीरा व कचरी है। ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज़्यादा पायी जाती है। ककड़ी के बीजों का भी चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है।  ककड़ी का रस निकालकर मुंह, हाथ व पैर पर लेप करने से वे फटते नहीं हैं तथा मुख सौंदर्य की वृध्दि होती है।  बेहोशी में ककड़ी काटकर सुंघाने से बेहोशी दूर होती है।  ककड़ी के बीजों को ठंडाई में पीसकर पीने से ग्रीष्म ऋतु में गर्मीजन्य विकारों से छुटकारा प्राप्त होता है।  ककड़ी के बीज पानी के साथ पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की त्वचा स्वस्थ व चमकदार होती है।...

कुछ लोगों की नापसंदगी से डरिए मत...

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कुछ लोगों की नापसंदगी से डरिए मत, क्योंकि जिन्हें शिकायत करनी हो, वे आपकी साँस की गति पर भी सवाल खड़ा कर सकते हैं। ऐसे लोगों से मानसिक दूरी बनाना आत्मसम्मान की पहली शर्त है। जीवन किसी की स्वीकृति की मोहताज नहीं, बल्कि अपने विवेक और आत्मबोध पर टिका होता है। जो लोग हर वक्त आपको असहज करें, आपकी उपस्थिति में खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करें, वे आपके लिए विषाक्त वातावरण का हिस्सा हैं। यह आवश्यक नहीं कि आपकी अनुपस्थिति से उनकी सोच बदले, पर यह तय है कि उनकी अनुपस्थिति से आपकी साँसें सहज होंगी। हमारे चारों ओर का दायरा ही हमें गढ़ता है — जैसे मिट्टी पौधे को आकार देती है। इसलिए यह तय करिए कि आप किस तरह के लोगों के बीच रहना चाहते हैं — वे जो सुनते हैं, समझते हैं, या वे जो बस दूसरों को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं। हर मुस्कान, हर चुप्पी, हर असहमति एक फ़िल्टर है — और इस फ़िल्टर से छनकर ही आपकी असली दुनिया बनती है। बदलना पाप नहीं, पर ख़ुद को खो देना मूर्खता है। इसलिए अपने जीवन-दायरे को पहचानिए, चिन्हित करिए — और ज़रूरत हो तो रेखा खींच दीजिए। –प्रवीण त्रिवेदी कुछ लोग आपको नापसंद करे त...

सिंदूर का पौधा, जानिए इस पौधे के बारे में.....।

 सिंदूर का पौधा , जानिए , इसके बारे में..... सिंदूर का पौधे के बारे में जानिए और  इसके क्या-क्या फायदे हो सकते हैं? जानिए.... सिंदूर का पौधा आप अपने गार्डन में भी लगा सकते हैं। सिंदूर किस चीज़ से बनता है?  सिंदूर वैसे तो चूना और हल्दी के मिक्सचर के साथ मरकरी (मरक्यूरी) को मिलाने से बनता है जो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन सिंदूर का एक पौधा भी होता है।  हां जी, सिंदूर का पौधा जिसे अंग्रेजी में Kamila Tree या Kumkum Tree भी कहा जाता है उसका एक पौधा होता है। ये पौधा देखकर कई लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं क्योंकि इसमें से जो फल निकलते हैं उससे पाउडर और लिक्विड फॉर्म में सिंदूर जैसा लाल डाई बनता है। इसे कई लोग लिक्विड लिप्स्टिक ट्री भी कहते हैं क्योंकि इससे निकला लाल डाई नेचुरली आपके होंठों को भी रंग सकता है। तो चलिए आज आपको हम सिंदूर के पौधे के बारे में कुछ जानकारी देते हैं। कहां अधिकतर उगाया जाता है सिंदूर का पौधा? सिंदूर का पौधा वैसे तो साउथ अमेरिका और कुछ एशियाई देशों में उगाया जाता है और भारत में इसे हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में उगाया जाता है। क्यों खास...