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डिप्रेशन की मानसिक समस्या से छुटकारा पाने की अनमोल टिप्स....आइये जानते हैं।

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💓 डिप्रेशन की मानसिक समस्या से छुटकारा पाने की अनमोल टिप्स 💓  🎯 खुद को सदा व्यस्त रखे...।  खुद को हलके फुल्के कार्यो में बिजी कर दे जिससे आपका मनोरंजन हो और आपको ख़ुशी मिले। जैसे की कोई स्पोर्ट गेम ,अपनी रूचि के अनुसार धार्मिक ,सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले। 🎯 अपना लक्ष्य निर्धारित करे...।  डिप्रेशन का एक कारण सही वक्त पर लक्ष्य पूरे नहीं होना भी होता है। इससे बचने के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित करे, बड़े बड़े कार्यो को छोटे छोटे हिस्से में बांटे , कुछ काम की प्राथमिकता निर्धारित करे और ऐसा काम करे जिसकी आपमे पूरी क्षमता हो।  🎯 सामाजिक रूप से सक्रिय हो। आप अपने करीबी लोगो के साथ समय बिताये। किसी भरोसेमंद दोस्त या रिश्तेदार को अपनी गुप्त बातें बताये। अपने आप को सबसे अलग करने की कोशिश न करे और दूसरो को अपनी हेल्प करने दे।  🎯 राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने से सकारात्मक विचारों को बल मिलता है। पॉवरफुल मेडिटेशन से मन शांत रहता है और मेन्टल स्टेट मेन्टेन रहती है। हो सके तो थोड़ी देर खुली हवा में टहले । प्रकृति का प्रभाव हमारे मन और तन दोनों पर पड़ता है...

खांसी से राहत के लिए ये 8 आयुर्वेदिक उपाय...।

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आप  अपने बच्चे को अगर नही देना चाहते Cough Syrup, तो खांसी से राहत के लिए ये 8 आयुर्वेदिक उपाय...। हाल ही में देश के कई राज्यों में Cough Syrup से बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कफ सिरप सुरक्षित नहीं है तो आखिर खांसी का इलाज कैसे करें? जानिए कि प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे असरदार आयुर्वेदिक उपाय दिए हैं जो कि न सिर्फ सुरक्षित हैं बल्कि बच्चों की खांसी को जड़ से खत्म करने में भी मदद कर सकते हैं। खांसी की समस्या होने पर अक्सर माता-पिता बच्चों को तुरंत राहत देने के लिए कफ सिरप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल ही में कुछ राज्यों में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं (Cough Syrup Controversy), जो कि बेहद चिंताजनक हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमें बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कफ सिरप में कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं जो बच्चों के लिए हानिकारक होते हैं, खासकर जब उनका सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए। इस बीच, अगर आप अपने बच्चे को बिना किसी साइड इफेक्ट के खांसी से आराम दिलाना चाहते हैं, तो आप कुछ आसान आयुर्वेदिक उपायो...

पंच तत्वों की साधना

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पंच तत्वों की साधना _________________ पंच तत्वों के द्वारा इस समस्त सृष्टि का निर्माण हुआ है। मनुष्य का शरीर भी पाँच तत्वों से ही बना हुआ है। इन तत्वों का जब तक शरीर में उचित भाग रहता है तब तक स्वस्थता रहती है। जब कमी आने लगती है तो शरीर निर्बल, निस्तेज, आलसी, अशक्त तथा रोगी रहने लगता है।  स्वास्थ्य को कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि तत्वों को उचित मात्रा में शरीर में रखने का हम निरंतर प्रयत्न करते रहें और जो कमी आवे उसे पूरा करते रहें। नीचे कुछ ऐसे अभ्यास बताये जाते हैं जिनको करते रहने से शरीर में तत्वों की जो कमी हो जाती है उसकी पूर्ति होती रह सकती है और मनुष्य अपने स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रहते हुए दीर्घ जीवन प्राप्त कर सकता है। पृथ्वी तत्व: पृथ्वी तत्व में विषों को खींचने की अद्भुत शक्ति है। मिट्टी की टिकिया बाँध कर फोड़े तथा अन्य अनेक रोग दूर किये जा सकते हैं। पृथ्वी में से एक प्रकार की गैस हर समय निकलती रहती है। इसको शरीर में आकर्षित करना बहुत लाभदायक है। प्रतिदिन प्रातःकाल नंगे पैर टहलने से पैर और पृथ्वी का संयोग होता है। उससे पैरों के द्वारा शरीर के विष खिच कर ...

बियर पीने से होते हैं ये नुकसान.. जानिए कौन- कौन से ?

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क्या आप  बियर  पीने के शौकीन हैं ? तो आज जानिए बियर पीने से होते हैं ये पांच नुकसान....। बियर आज के समय में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है . आइए आपको बताते हैं कि इसको पीने के पांच नुकसान कौन कौन से हैं ? बियर  पीने से  होने वाले नुकसान  1: बियर पेट की फैट बढ़ा सकती है. रोजाना पीने से आपका वेस्टलाइन धीरे-धीरे बढ़ता है और फैट जमा होता है. 2: महिलाओं में बियर हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकती है. यह पीरियड्स, मूड और एस्ट्रोजन को प्रभावित करती है. 3: पुरुषों में यह टेस्टोस्टेरोन कम और एस्ट्रोजन बढ़ा देती है. इसके कारण ऊर्जा, परफॉर्मेंस और आत्मविश्वास प्रभावित हो सकते हैं. 4 : बियर हड्डियों को कमजोर कर सकती है और 35 साल के बाद इसका रिस्क और बढ़ जाता है. 5 : बियर लिवर पर भी दबाव डालती है. लंबे समय तक पीने से फैटी लिवर, सिरोसिस और अल्कोहलिक हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है. 6 : अल्कोहल डिहाइड्रेशन और गैस्ट्रिक इश्यूज भी बढ़ाता है. यह पेट की लाइनिंग को इरिटेट करता है, जिससे एसिडिटी, उल्टी और मिचली हो सकती है. 7: बियर पीना दिमाग की कार्यशैली पर भी असर डालता है. लंबे ...

आम के पत्तों के फायदे.... आईये जानते हैं।

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आम के पत्तों के बारे में यह पोस्ट आपको चौंका देगी ज़्यादातर लोग इन्हें फेंक देते हैं... लेकिन ये पत्ते हमारी जान बचा सकते हैं। आखिरकार आम के पत्तों को कभी नज़रअंदाज़ क्यों नहीं करना चाहिए...। 1️⃣ मधुमेह नियंत्रित करें आम के पत्तों में टैनिन और एंथोसायनिडिन होते हैं जो रक्त शर्करा, एंजियोपैथी और रेटिनोपैथी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: 10-15 पत्तों को उबालें, रात भर छोड़ दें, खाली पेट पिएं। 2️⃣ उच्च रक्तचाप कम करें ये रक्त वाहिकाओं को मजबूत करते हैं और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: आम के पत्तों की चाय दिन में 2 बार, गर्म या ठंडी, खाली पेट पिएं। 3️⃣ वजन घटाने में सहायक पाचन को बढ़ावा देता है, वसा भंडारण को नियंत्रित करता है और भूख को कम करता है। कैसे इस्तेमाल करें: एक महीने तक रोज़ाना आम के पत्तों का पानी/चाय पिएं। 4️⃣ गुर्दे और पित्त की पथरी को घोलता है विषाक्त पदार्थों को निकालता है और पथरी को प्राकृतिक रूप से तोड़ता है। इस्तेमाल का तरीका: सूखे पत्ते → पाउडर → रात भर भिगोएँ → रोज़ाना पिएँ। 5️⃣ बेचैनी और चिंता को शांत कर...

अच्छी नींद क्यों नही आती...? जानिये।

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सोने से पहले ये चीजें तो नहीं खाते आप?  नींद तो खराब आती ही है, सपने भी बुरे दिखाई देते हैं? हमारा दिन कैसे जाएगा इसमें हम क्या खा रहे हैं इसका भी अहम रोल होता है, कभी-कभी हम कुछ ऐसा खा लेते हैं जिससे हमें नींद नहीं आती है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. इंसान को फ्रेश होने के लिए, स्टेबल रहने के लिए और वर्क के लिए रेडी रहने के लिए नींद की जरूरत होती है. हालांकि, कभी-कभी घंटों बिस्तर पर पड़े रहने के बाद भी नींद नहीं आती, बार-बार बैचेनी होती है और हमें लगता है कि ऐसा क्या हो गया कि इतनी कोशिश के बाद भी नींद क्यों नहीं आ रही है. इसके अलावा, कई बार बीच में डरावने और भयानक सपने आने लगते हैं और नींद खुल जाती है. अगर आपके साथ भी इस तरह की दिक्कत हो रही है, तो चलिए बताते हैं कि आखिर वह कौन-सा कारण है जिससे आप इस तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं. इसको लेकर हुई रिसर्च इस तरह की दिक्कतों को लेकर एक कनाडाई रिसर्च फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी में पब्लिश हुई. इसमें बताया गया कि इस तरह की परेशानियों के पीछे हमारे खाने-पीने के तरीके जिम्मेदार हैं. खासकर डेयरी प्रोडक्ट्स, मिठाइयां और ...

पेट में गैस बनने के मुख्य कारण और निवारण...।

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पेट में गैस बनने के मुख्य कारण 1. पाचन संबंधी कारण  a) अधपचा खाना  कुछ खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, गोभी, मूली, ब्रोकली आदि को पचाना मुश्किल होता है। ये फाइबर और कार्बोहाइड्रेट्स पेट में पूरी तरह नहीं पचते और बड़ी आंत में बैक्टीरिया इन्हें किण्वित (ferment) करते हैं, जिससे गैस बनती है। b) एन्ज़ाइम की कमी (Enzyme Deficiency): कुछ लोगों को लैक्टोज (दूध में पाई जाने वाली शक्कर) पचाने वाला एंजाइम (lactase) पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता, जिससे लैक्टोज इनटॉलरेंस हो जाती है और गैस बनती है। 2. खानपान की आदतें (Eating Habits) a) तेजी से खाना या बोलते हुए खाना: इससे ज्यादा हवा निगली जाती है (aerophagia), जो बाद में गैस बनती है। b) कार्बोनेटेड ड्रिंक्स: सोडा या कोल्ड ड्रिंक्स में कार्बन डाइऑक्साइड होता है, जिससे गैस पेट में जमा होती है। 3. आंतों की स्वास्थ्य समस्याएं (Gut-Related Issues) a) इरीटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS): यह एक आम विकार है जिसमें आंतें सामान्य से अधिक संवेदनशील होती हैं, और गैस, ऐंठन, दस्त या कब्ज हो सकती है। b) बैक्टीरियल ओवरग्रोथ (SIBO): छोटी आंत में बैक्टीरिया क...

माइग्रेन से बचने के घरेलू उपाय.... जानिए ।

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माइग्रेन से बचने के लिए परम्परागत घरेलू उपचार...... वैसे तो माइग्रेन से यही अंदाज़ा लगाया जाता है कि ब्रेन में प्रॉपर ब्लड सप्लाई नहीं हो रही है। और कभी कभी ये 6-6 महीने तक परेशान भी नही करता लेकिन जब भी होता है तब ये तौबा तौबा करवा देता है। सामान्य कारण..... (1). नींद की कमी या अनिद्रा (2). टेंशन (3). सोच विचार  (4). जिम्मेदारियां (5). सफलता असफलता (6). खून की कमी (7). कब्जी (8). गैस एसिडिटी (9). गरिष्ठ भोजन (10). ज्यादा ठंड (11). ज्यादा गर्मी इत्यादि। परम्परागत कुदरती निवारण..... (1). अगर माइग्रेन हो तो सबसे पहले हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम किसी दवा से ज्यादा असर करता है। सरदर्द होने पर कंधों और गर्दन की भी मालिश करनी चाहिए। इससे दर्द से राहत मिलती है। (2). एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। माइग्रेन में बर्फ के टुकडों का भी प्रयोग किया जा सकता है। (3). सिर दर्द होने पर अपनी सांस की गति को थोड़ा धीमा कर दीजिए, लं...

निम्न रक्तचाप ( Low Blood Pressure) लक्षण और उपाय.... जानिए।

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निम्न रक्तचाप  (Low Blood Pressure ) क्या है?.... लक्षण और उपाय, जानिए...। लो बीपी यानी "निम्न रक्तचाप" (Low Blood Pressure) एक ऐसी स्थिति है जब व्यक्ति का रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है। सामान्य बीपी रेंज होती है 120/80 mmHg, और जब यह 90/60 mmHg या उससे कम हो जाए, तो उसे लो बीपी कहा जाता है। लो बीपी की स्थिति में शरीर के अंगों को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। आयुर्वेद में इसे "उदकवहा स्रोतस का दोष" कहा जाता है, जो वात दोष की असंतुलन स्थिति से जुड़ा होता है। लो बीपी के मुख्य लक्षण...  अचानक चक्कर आना या बेहोशी  धुंधली दृष्टि  थकावट, सुस्ती या ऊर्जा की कमी  दिल की धड़कन का तेज़ या असामान्य होना  ठंडा व पसीनेदार शरीर  ध्यान की कमी या भ्रम की स्थिति यदि ये लक्षण बार-बार अनुभव हों, तो लापरवाही न करें – यह शरीर का संकेत हो सकता है कि ऊर्जा व रक्त संचार में बाधा आ रही है। आयुर्वेद में लो बीपी का दृष्टिकोण... आयुर्वेद के अनुसार लो बीपी मुख्य रूप से वात दोष की अधिकता, पाचन शक्ति की कमजोरी और...

युवाओं में होने वाला तीसरा कॉमन कैंसर कौन सा है... आइए जानते हैं।

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युवाओं में होने वाला तीसरा सबसे कॉमन है ये कैंसर, शुरुआती संकेत ही होते हैं बेहद खतरनाक....। कैंसर की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है. आपको बताते हैं कि युवाओं में होने वाला तीसरा सबसे कॉमन कैंसर कौन सा है और यह खतरनाक क्यों होता है? अब तक माना जाता था कि कैंसर जैसी बीमारियाँ सिर्फ बुजुर्गों को होती हैं. लेकिन हाल की रिसर्च से साफ हो गया है कि कोलोन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) अब युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है. खासकर 20 से 40 साल की उम्र के बीच के लोग अब इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं.  American Cancer Society और World Health Organization (WHO) के अनुसार, कोलोन कैंसर अब युवाओं में होने वाला तीसरा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है. रिसर्च क्या कहती है? JAMA Network और NIH (National Institutes of Health) की रिपोर्ट के अनुसार, 20 से 49 साल के युवाओं में कोलोन और रेक्टल कैंसर के मामले पिछले दो दशकों में लगातार बढ़े हैं.  American Cancer Society की 2024 की रिपोर्ट में बताया गया है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर के जो नए मामले सामने आते हैं, उनमें से...

किडनी फेल्योर या गुर्दे की विफलता... कारण और निवारण, जानिए....।

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किडनी शरीर का बेहद अहम अंग है, जो खून को साफ करने, टॉक्सिन्स बाहर निकालने और शरीर में पानी और खनिज का संतुलन बनाए रखने का काम करती है. जब किडनी सही तरीके से काम करना बंद कर देती है, तो शरीर में खतरनाक टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. किडनी फेलियर या क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे: हाई ब्लड प्रेशर – लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाता है. डायबिटीज – भारत में डायबिटीज किडनी रोग का सबसे बड़ा कारण है. बार-बार होने वाले इंफेक्शन – किडनी में संक्रमण से इसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है. लाइफस्टाइल और डाइट – ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी का सेवन किडनी पर दबाव डालता है. लंबे समय तक दवाइयों का इस्तेमाल – खासतौर पर पेनकिलर या स्टेरॉयड का. कितनी खतरनाक है किडनी की बीमारी? किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं. जब तक मरीज को थकान, सूजन, पेशाब की समस्या या ब्लड प्रेशर में बदलाव जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. अंतिम स्टेज पर मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्र...

अचानक फड़कने लगती हैं आँखें...जानिए क्यों ❓

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 अचानक फड़कने लगती हैं आँखें, जानिए क्यों ? Eye Twitching Vitamin Deficiency:  भारतीय समाज में आंख फड़कना अक्सर शुभ या अशुभ संकेत माना जाता है. दाईं आंख फड़के तो अच्छा समझा जाता है और बाईं आंख फड़के तो लोग चिंता करने लगते हैं. लेकिन आंख फड़कने का विज्ञान से भी कोई संबंध हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि आंखों का बार-बार फड़कना कोई ज्योतिषीय संकेत नहीं, बल्कि आपके शरीर में मौजूद पोषण की कमी हो सकता है. डॉ. सोनल बताती हैं कि, लगातार आंख फड़कना कई बार शरीर में कुछ खास विटामिन्स की कमी का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं इसका असली कारण क्या है और किन विटामिन्स की कमी आंख फड़कने की वजह बनती है. असली वजह क्या है? आंख फड़कने को मेडिकल भाषा में मायोकिमिया (Myokymia) कहा जाता है. यह एक प्रकार की मांसपेशियों की ऐंठन होती है, जो अक्सर आंख की पलकों में महसूस होती है. यह कुछ ही सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक चल सकती है. विटामिन की कमी से आंख क्यों फड़कती है? मैग्नीशियम की कमी आंख फड़कने का सबसे आम कारण मैग्नीशियम की कमी है. यह मिनरल मांसपेशियों को आराम देने और तंत्रिका तंत्र को...

लीवर नहीं रहेगा फैटी और बॉडी भी होगी डिटॉक्स..... जानिए कैसे ?

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न लिवर रहेगा फैटी और बॉडी भी होगी डिटॉक्स, बस रुटीन में लानी होंगी डॉक्टर की बताईं ये 3 आदतें लिवर हमें शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों मे से एक है, लेकिन हम इस पर ज्यादा ध्यान तब तक नहीं देते, जब तक हमें कोई बड़ी समस्या नहीं दिखती है. आइए आपको बताते हैं कि लिवर को कैसे सुरक्षित रखा जाए? हममें से ज्यादातर लोग लिवर के बारे में तब सोचते हैं जब इसमें कोई समस्या आ जाती है. जबकि यह हमारे शरीर का सबसे मेहनती अंग है. लिवर पाचन को दुरुस्त रखता है, खाने-पीने की चीजों को प्रोसेस करता है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है. आयुर्वेद में लिवर को और भी खास माना गया है. इसे रक्तवाह स्रोत से जोड़ा गया है, यानी यह न सिर्फ खून और पित्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है, बल्कि इसका असंतुलन दिल, फेफड़े और पेट समेत कई अंगों को प्रभावित कर सकता है. AVP रिसर्च फाउंडेशन के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. सोमित कुमार के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए बड़े बदलाव नहीं, बल्कि जीवन में छोटे-छोटे बदलाव जरूरी हैं. आयुर्वेद के अनुसार, लिवर का सीधा संबंध पित्त दोष से है, जो शरीर में गर्मी और पाचन को नियंत्रित करता है. ज्य...

अमरूद की पत्ती के स्वास्थ्य सम्बन्धित लाभ

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अमरूद की पत्ती कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक प्राकृतिक उपाय है। यह पाचन में सुधार करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, वजन कम करने में मदद करता है, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है, हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, और त्वचा की स्थिति को बेहतर बनाता है.  अमरूद की पत्ती के कुछ विशेष फायदे: पाचन: अमरूद की पत्ती चबाने या उबालकर पीने से पाचन में सुधार होता है, पेट की गैस, एसिडिटी और कब्ज से राहत मिलती है.  रोग प्रतिरोधक क्षमता: अमरूद की पत्ती विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है.  वजन घटाने में मदद: अमरूद की पत्ती कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम करने में मदद करती है, जिससे वजन कम होता है.  रक्त शर्करा नियंत्रण: अमरूद की पत्ती रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.  हृदय स्वास्थ्य: अमरूद की पत्ती हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करती है, क्योंकि यह रक्तचाप को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती है.  त...

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस.. एक अनचाही बीमारी, कारण, लक्षण, एवं उपचार... जानिए

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक अनचाही बीमारी... सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के कारण, संकेत, लक्षण एवं उपचार.. जब उपास्थियों (नरम हड्डी) और गर्दन की हड्डियों में घिसावट होती है तब सर्वाइकल की समस्या उठेगी। इसे गर्दन के अर्थराइटिस के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राय: वृद्धावस्था में उठता है। सर्वाइकल स्पॉन्डलाइसिस के अन्य दूसरे नाम सर्वाइकल ऑस्टियोआर्थराइटिस, नेक आर्थराइटिस और क्रॉनिक नेक पेन के नाम से जाना जाता है। सर्वाइकल स्पॉन्डलाइसिस गर्दन के जोड़ों में होने वाले अपक्षय से सम्बंधित है जो उम्र के बढ़ने के साथ बढ़ता है। 60 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों में प्राय: यह पाया जाता है। इसके कारण अक्षमता या अशक्तता हो जाती है। बच्चों और युवाओं की तुलना में बूढ़े लोगो में पानी की मात्रा कम होती है जो डिस्क को सूखा और बाद में कमजोर बनाता है। इस समस्या के कारण डिस्क के बीच की जगह गड़बड़ हो जाती है और डिस्क की ऊंचाई में कमी लाता है। ठीक इसी प्रकार गर्दन पर भी बढ़ते दबाव के कारण जोड़ों और या गर्दन का आर्थराइटस होगा। घुटने के जोड़ की सुरक्षा करने वाली उपास्थियों का यदि क्षय हो जाता है तो हड्डियों में घर्षण होगा। उपास्थि...