पारिजात वृक्ष - कल्प वृक्ष
पारिजात वृक्ष *********** सबसे अप्रत्याशित स्थानों में एक दुर्लभ वृक्ष है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले बहुमूल्य रत्नों में एक ये वृक्ष भी था, पारिजात नाम है इसका,इसे ही कल्पवृक्ष भी कहा गया है...। पूरी रात सुगंध बिखेरता पारिजात,भोर होते ही अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है! अलौकिक सुगंध से सराबोर इसका पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करता, अपितु तन को भी शक्ति देता है ! एक कप गर्म पानी में इसका फूल डालकर पियें, अद्भूत ताजगी मिलेगी....। यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है....। इसके नीचे बैठने, या छूने मात्र से थकान दूर हो जाती है और नई ऊर्जा का संचार होता एक मान्यता के अनुसार परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुन्द्र मंथन से हुई थी, जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में रोप दिया था! यह वृक्ष एक हजार से पांच हजार वर्ष तक जीवित रह सकता है, पारिजात वृक्ष के वे ही फूल उपयोग में लाए जाते है, जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते है, यानि वृक्ष से फूल तोड़ने की पूरी तरह मनाही है! यह वृक्ष आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है, साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी भगाता है...