हौसला पतवार है

वक्त के आगे कहाँ चलता किसी का वार है
जो नही समझे समय पर तो गया वो हार है

कौन कितना है सही कोई कहे कैसे भला
हम सही हैं तुम गलत हो बस यही तकरार है

चाल चलने में लगी कैसी दिमागी  साजिशें
दिल बहुत मासूम धोखा  यार बेशुमार है

कह रहा है कौन अपने आप से ही बस यही
पास आयेगा किनारा हौसला  पतवार है

बीत जायेगा  समय जो खार बनकर है मिला
प्यार है जब साथ अपने कब खुशी दुश्वार है
------- नीरु 'निरुपमा मिश्रा  त्रिवेदी'



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