स्मृति - आँगन

बूँद - बूँद से प्रीति गागर- घन भरे
बेचैन हैं मन - भाव नित नयन झरे
पीड़ा के बादल ये घनेरे सखी
सूखे वो घाव क्यों स्मृति - आँगन हरे
---- निरुपमा मिश्रा " नीरू "

Comments

Popular posts from this blog

सुखद भविष्य का अनुष्ठान... पितृपक्ष ।

शिव रात्रि पर्व पर विशेष...शिव-शक्ति से सीखिए बच्चों की परवरिश का सही तरीका।

Gen-Z क्या है ? इसे सोशल मीडिया की लत क्यों है? आइये जानते हैं...।