ख्वाबों में बुला लेना मुझे

याद आये अगर ख्वाबों में बुला लेना मुझे
खुशबू जैसी हूँ साँसों में बसा लेना मुझे

रहे चाहत जब भी कुछ गुनगुनाने की
रहे हसरत जब भी सब भूल जाने की
गीत  के आँगन में सुरों से सजा लेना मुझे

तन्हा-तन्हा जब भी जिंदगानी लगे
महफिलें तुम्हें  जब भी बेगानी लगे
अपनी यादों के गुलशन से चुरा लेना मुझे

मन से मन के अपने कभी न दूरी हो
मेरा दिल,धड़कनें हर साँस तेरी हो
तन्हा छोड़े जमाना तो अपना लेना मुझे

उदास लम्हों में कहीं खुशी खो जाये
सहमी-सहमी कभी जिंदगी हो जाये
भेज कर अपना मन-डाकिया बुला लेना मुझे

प्यार दो-चार बातों की सौगात नही
दिन के साथ वहीं रहती कब रात नही
वफाओं-इरादों से तुम आजमा लेना मुझे
---- निरुपमा मिश्रा "नीरू "

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