Posts

शान अपनी सभी तो दिखाते रहे

Image
                 शान अपनी सभी तो दिखाते रहे                  दर्द भी क्या कहें गुनगुनाते रहे                  आपके प्यार में हम बेहया हो गये                  प्यार भी क्या ज़हर सब पिलाते रहे                  आपने दे दिया ग़म यही है बहुत                  और क्या दे सके मुस्कराते रहे बात कुछ भी नहीं और बातें बहुत आप भी तो कहानी सुनाते रहे हम रहे राह में चल दिये दो कदम आप मंजिल बहुत पास आते रहे --- नीरु ( निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी)

अब मिले आप

Image
अब मिले आप भी, ज़िंदगी की तरह रोशनी मिल गयी, बंदगी की तरह हम नहीं बेख़बर, आपसे अब रहे आप हैं अब हमारी,ख़ुशी की तरह ---- नीरु

आसमां वही फिर उठाकर चले

Image
                    बात कोई जो दिल में छुपाकर  चले ।                     आसमां भी वही फिर उठाकर चले ।                      राह में ठोकरें भी बहुत- सी लगी,                      हौसले हम सभी फिर जगाकर चले।                      देखिये तो सनम इक इधर भी नज़र,                      हाथ भी तो हमीं से मिलाकर चले । आप भी साथ में अब हमारे हुए, ख़्वाब अपने सभी हम सजाकर चले । कौन दुश्मन हमारा यहाँ पर हुआ भेद अपने सभी हम भुलाकर चले ---- नीरु ( निरुपमा मिश्रा)

शातिर निगाहें

Image
                                                    सुबह के वक्त थोड़ी सुनसान सड़क                                                        पर फैली गंदगी के बीच                                                         सांवली-सलोनी काया                                                    अपनी उम्र के हिसाब से कुछ ज़्यादा                                          ...

तेरी वापसी

Image
                                            तेरी वापसी                                        जूही , चमेली,कचनार                                 चंपा,बेला और हरसिंगार के फूल                                         महक उठे फिर                                         दिवस मास नहीं                                  ऐसा लगा कि सदियों बाद                          ...

रंग अपने बचपन के

रंग बदलती हुई दुनिया में, रंग अपने बचपन के उम्र भले ही कितनी होगी, दिल दो रहने बचपन से दुनियादारी के चक्कर में, ख़ुद को भी हम भूल गये हमसे हमको मिलवाये, वो ढंग सलोने बचपन के ---- नीर...

अक्षरों में एहसास के पल

Image
हंसमुख स्वभाव की थी नवधा और उसके पति संयम भी उसी के स्वभाव के जैसे थे | दोनों पति-पत्नी को कहानी, कविताओं, शेरो-शायरी का बहुत शौक़ था, नवधा तो कभी-कभार कहानियां-कविताएं आदि भी लिखा करती जिसके पहले पाठक अक्सर उसके पति ही हुआ करते , नवधा को बचपन से ही लिखने का शौक़ रहा इसलिए वो अपने विवाह के पहले जब भी कुछ लिखा करती तो सबसे छुपा कर अपने माता-पिता, भाई-बहनों को पढ़ाया करती थी, नवधा का परिवार उसके लेखन को सराहता, और भी बेहतरीन लिखने को हमेशा प्रेरित भी किया करता, शादी के बाद उसके ससुराल में भी किसी को उसके लेखन के शौक पर कोई आपत्ति नहीं थी|     विवाह के बाद कुछ दिनों तक तो नवधा का लेखन का हुनर छिप-सा गया था मगर परिवार वालों की इच्छा के अनुसार और अपने कुछ ख़ास दोस्तों का दिल रखने के लिए नवधा ने समय निकाल कर फिर से लेखनी थामी | एक दिन नवधा अपने रोज़मर्रा के काम-काज़ निपटा रही थी कि आलमारी साफ़ करते समय उसके हाथों में उसके पति की एक पुरानी डायरी लगी तो वो उसके पन्ने पलटने लगी, बीच में गुलाबी स्याही से लिखी प्यार भरी तहरीर पढ़ कर वो सोचने लगी कि ये क्या है , क्या उसके पति की विवाह से पह...