सैलरी आते ही 10 दिन में खत्म...आखिर क्यों ❓️इन गलतियों की वजह से नहीं बचता पैसा, जानें क्या करें और क्या नहीं..❗️
सैलरी आते ही 10 दिन में खत्म..❓️ इन गलतियों की वजह से नहीं बचता पैसा, जानें क्या करें और क्या नहीं...❗️
📲 हर महीने सैलरी क्रेडिट होने पर फोन में एक बार बैंक अलर्ट आता है। इसके बाद पूरे महीने EMI, UPI और दूसरे payment के notifications आते रहते हैं। अगर सैलरी आने के सिर्फ 10-15 दिन बाद ही बैंक अकाउंट खाली होने लगे और महीने के आखिरी दिनों में आने-जाने के पैसे भी सोचने पड़ें, तो सिर्फ कम सैलरी को इसकी वजह मानना सही नहीं है।
कई बार समस्या कम कमाई की नहीं, बल्कि पैसे को manage करने के तरीके की होती है। सैलरी आते ही अगर पूरा पैसा खर्च करने के लिए available मान लिया जाए तो महीने के आखिर तक पैसे की कमी होना तय है। ✅️
तो आखिर सैलरी मिलते ही क्या करना चाहिए? किन गलतियों से बचना चाहिए और पैसे को पूरे महीने कैसे चलाया जाए? आइए समझते हैं। 💁♀️
1 लाख रुपये की सैलरी, फिर भी बचत मुश्किल..🤔
मान लीजिए नोएडा के 39 वर्षीय रोहित की monthly take-home salary 1 लाख रुपये है। उनकी EMI 30 हजार रुपये है। बच्चों की फीस, राशन, बिजली-पानी, आने-जाने और दूसरे जरूरी खर्चों में करीब 35 हजार रुपये चले जाते हैं।
इसके बाद मेडिकल इंश्योरेंस, मोबाइल बिल, OTT subscriptions, online food, shopping, weekend outing और छोटे-बड़े दूसरे खर्च शुरू हो जाते हैं।😶
कोई एक खर्च बहुत बड़ा नहीं लगता, लेकिन महीनेभर के छोटे-छोटे खर्च मिलकर अच्छी-खासी रकम निकाल देते हैं। नतीजा यह होता है कि महीने के 10-15 दिन बाद ही पैसे कम पड़ने लगते हैं।
यहां सबसे बड़ी गलती है कि रोहित ने अपनी पूरी 1 लाख रुपये की सैलरी को खर्च करने के लिए available मान लिया। जबकि सैलरी का कुछ हिस्सा पहले ही saving, investment, emergency fund और future expenses के लिए अलग होना चाहिए था।🥸
यानी आपकी पूरी salary वास्तव में खर्च करने वाली रकम नहीं है।😐
तो फिर क्या करना चाहिए आइए जानते हैं...😊
😌 महीने के आखिर में बचत करने की सोच बदलें
बहुत से लोग सोचते हैं कि पहले महीने के सभी जरूरी और गैर-जरूरी खर्च कर लेते हैं और आखिर में जो पैसा बचेगा, उसे save कर देंगे।
लेकिन अक्सर महीने के आखिर में बचता कुछ नहीं है।
इसलिए तरीका उल्टा करें।
Salary आते ही पहले saving और investment की रकम अलग करें। इसके बाद जरूरी खर्चों के लिए पैसा रखें और फिर lifestyle expenses का budget तय करें।
शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन कुछ महीनों तक लगातार ऐसा करने से saving की habit बन सकती है।
याद रखें:✍️
😊 पहले बचत, फिर खर्च — न कि पहले खर्च और फिर बचत।
सैलरी को पांच हिस्सों में बांटें
हर व्यक्ति और परिवार की financial situation अलग होती है। इसलिए 50:30:20 जैसे popular formulas हर किसी पर लागू हों, यह जरूरी नहीं है।
आप अपनी income और जरूरतों के हिसाब से salary को पांच हिस्सों में बांट सकते हैं।
1. घर चलाने के लिए पैसा
इसमें वे खर्च शामिल करें जो हर महीने करने ही पड़ते हैं।
●किराया या EMI
●राशन
●बिजली-पानी
●गैस
●स्कूल फीस
●घरेलू मदद
जरूरी travel expenses
यह आपका essential expenses fund होगा।
2. भविष्य के लिए पैसा
इस हिस्से में future goals के लिए रकम रखें।
जैसे:💁🏻♂️
SIP
Retirement planning
बच्चों की education
घर या दूसरे long-term goals
इस पैसे को महीने के अंत में बचाने के बजाय salary आते ही अलग कर दें।
3. Emergency fund और insurance
अचानक medical emergency, नौकरी में बदलाव या किसी बड़े खर्च की स्थिति में emergency fund काम आता है।
इसलिए salary का कुछ हिस्सा emergency fund और जरूरी insurance के लिए रखना चाहिए।
इसका उद्देश्य यह है कि अचानक आने वाला बड़ा खर्च आपके पूरे monthly budget को खराब न कर दे।
4. सालाना और बड़े खर्चों के लिए पैसा
कई लोग इस हिस्से को भूल जाते हैं। फिर साल में एक-दो बार आने वाला बड़ा खर्च अचानक financial pressure बन जाता है।
जैसे:
●गाड़ी का insurance
●त्योहारों का खर्च
●घर की repair
●बच्चों की annual fees
●शादी-ब्याह
●vacation
●दूसरे annual expenses
उदाहरण के लिए अगर किसी साल गाड़ी के insurance और दूसरे बड़े खर्चों में 60 हजार रुपये लगने हैं, तो हर महीने 5 हजार रुपये अलग रखे जा सकते हैं।
इस तरह साल के अंत में एक साथ बड़ी रकम निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
5. अपनी जिंदगी और lifestyle के लिए
बजट का मतलब यह नहीं है कि आप बाहर खाना, घूमना, shopping या movie पूरी तरह बंद कर दें।
इन खर्चों के लिए भी budget रखें।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
●बाहर खाना
●shopping
●movie
●OTT subscription
●घूमना
●hobbies
●weekend outing
लेकिन इन खर्चों की एक तय limit होनी चाहिए।
😊 सबसे पहले अपने शुरुआती 10 दिनों का खर्च देखें
अगर हर महीने salary आने के 10 दिन बाद ही पैसे कम पड़ने लगते हैं, तो अगले महीने सबसे पहले इन 10 दिनों के खर्च का analysis करें।
अपने UPI, debit card और credit card transactions देखें और हर payment को चार categories में रखें:
जरूरत | सुविधा | Lifestyle | बिना सोचे किया गया खर्च
कई बार 99, 180, 349 या 499 रुपये का खर्च बहुत छोटा लगता है। लेकिन महीने में ऐसे 15-20 payments हो जाएं तो हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं।
एक-दो महीने लगातार expenses track करने पर आपको खुद पता चल जाएगा कि पैसा कहां जा रहा है।
😊 पूरे महीने का पैसा शुरुआत में ही खर्च न करें
मान लीजिए जरूरी खर्च और investment निकालने के बाद आपके पास lifestyle और flexible expenses के लिए 20 हजार रुपये बचे हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि पहले 10-12 दिनों में 10 हजार रुपये खर्च कर दें।
आप इस रकम को weekly budget में बांट सकते हैं।
उदाहरण के लिए:
20,000 रुपये ÷ 4 = करीब 5,000 रुपये प्रति सप्ताह
अब हर सप्ताह एक limit के अंदर खर्च करने की कोशिश करें।
इससे महीने की 10 तारीख को ही पता चल जाएगा कि खर्च budget के अंदर है या नहीं। महीने की 30 तारीख को पता चलने का कोई फायदा नहीं होगा।
एक अच्छी habit यह भी हो सकती है कि हर Sunday सिर्फ 10 मिनट अपने खर्च की समीक्षा करें।
देखें: 💁♀️
इस हफ्ते कितना खर्च हुआ?
कितना पैसा बचा है?
अगले सप्ताह के लिए कितना available है?
😊 Salary बढ़े तो पूरा lifestyle upgrade न करें
Salary बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन income बढ़ते ही पूरा lifestyle महंगा कर लेना financial planning को कमजोर कर सकता है।
मान लीजिए आपकी salary 1 लाख से बढ़कर 1.15 लाख रुपये हो गई।
इसका मतलब यह नहीं कि पूरे अतिरिक्त 15 हजार रुपये नई EMI, महंगे smartphone, ज्यादा shopping या बाहर खाने में खर्च कर दिए जाएं।
इस अतिरिक्त रकम को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर:
7,500 रुपये investment बढ़ाएं
3,000 रुपये emergency या future expenses के लिए रखें
4,500 रुपये lifestyle improvement पर खर्च करें
इस तरह salary बढ़ने का फायदा आज के साथ-साथ future में भी मिलेगा।
😊 महंगी चीज खरीदने से पहले 30 दिन रुकें
कोई महंगा smartphone, gadget, furniture या दूसरी बड़ी चीज खरीदने का मन हो तो तुरंत payment करने के बजाय 30-day rule अपनाया जा सकता है।
पहले खुद से पूछें:
क्या यह वास्तव में जरूरी है?
अगर 30 दिन बाद भी इसकी जरूरत महसूस होती है और आपका budget इसकी अनुमति देता है, तभी खरीदने पर विचार करें।
कई बार तुरंत खरीदने की इच्छा कुछ दिनों बाद खुद ही खत्म हो जाती है।
😊 Credit Card को extra income न समझें
Credit Card सुविधा है, अतिरिक्त income नहीं।
यह बात हमेशा याद रखें।
अगर आप इस महीने की जरूरतें पूरी करने के लिए credit card का इस्तेमाल कर रहे हैं और अगले महीने की salary से उसका bill चुकाना तय है, तो आपकी अगली salary का कुछ हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है।
इससे नया महीना शुरू होते ही budget पर दबाव बन जाता है।
इसलिए ऐसी खरीदारी से बचें जिसकी payment करने के लिए आपको अगली salary का इंतजार करना पड़े।
आज की जरूरत के लिए कल की salary खर्च करना लंबे समय में financial pressure बढ़ा सकता है।
अगले महीने से अपनाएं यह Simple 💁🏻♂️
●Money Plan
●Salary Day
●Salary आते ही:
Day 1
जरूरी expenses की रकम अलग करें
Investment/SIP की रकम अलग करें
Emergency fund के लिए रकम निकालें
Annual expenses के लिए पैसा अलग रखें
Day 2
पूरे महीने के flexible और non-essential expenses की limit तय करें।
हर Sunday
सिर्फ 10 मिनट बैठकर पूरे सप्ताह के खर्च की समीक्षा करें।
Day 10
पहले 10 दिनों के UPI, card और cash expenses check करें।
Day 15
महीने के बीच में देखें कि कितना पैसा खर्च हुआ और कितना balance बचा है।
Day 25
अगले महीने आने वाले बड़े खर्चों की list तैयार करें।
Month End
अगर महीने के आखिर में पैसा बच गया है तो उसे सिर्फ इसलिए खर्च न करें कि नया महीना आने वाला है।
उस रकम को future expenses, emergency fund या investment में इस्तेमाल किया जा सकता है।
आखिर में सबसे जरूरी बात..😎
Financial planning का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जिंदगी के छोटे-छोटे सुखों पर खर्च करना बंद कर दें।
असल मकसद यह है कि आपको पता हो कि आपका पैसा कहां जा रहा है।
Salary कम हो या ज्यादा, अगर पूरा पैसा बिना planning के खर्च हो जाए तो महीने के आखिर में परेशानी हो सकती है।
वहीं, अगर salary आते ही saving, investment, emergency fund और जरूरी expenses अलग कर दिए जाएं और lifestyle खर्चों की limit तय हो, तो सीमित income में भी बेहतर financial discipline बनाया जा सकता है।
पैसा कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है कि उसे कैसे manage करते हैं।
↪️ Expert Panel
●तारेश भाटिया, Certified Financial Planner
●सुधीर कुमार गुप्ता, Financial Planner
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