Posts

दर्द

Image
सिहर-सहम उठता ये ज़माना हर आँख रोई जिंदगी ने जब- जब भी अर्थी मौत की ढोई कहीं टूटे सपनें किसी के छूट गये अपने पाया इस दर्द को जिसने कब भूलता कोई --- निरुपमा मिश्रा " नीरू "

लौट आना प्रिये

Image
उगते हुए सूरज हो तुम अभी बहुत होगा वंदन- अभिनंदन , पर दर्प से दीप्ति तुम्हारी प्रसन्नता जब चरम पर होगी क्या देख सकोगे तुम किसी मन की पीड़ा , फिर जब तुम ढलने लगोगे होंगे द्वार बंद प्रशंसा के कौन समझेगा तुम्हारी पीड़ा , तब भी तुम्हारे सहारे हैं ये जो चाँद - सितारे घर आने की तुम्हारी राह देखेंगे कि लौट आना प्रिये जीवन के पथ पर द्वार खोले मिलेगा तुम्हें कोई अपना तुम्हारी रश्मियों में देखने को अपना सवेरा ---- नीरु 'निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी'

जीवन की बगिया

Image
मैं सुखों की शाम बनूं तू आशाओं की भोर बने मैं रहूँ तेरी प्राणप्रिया तू साँसों की डोर बने जीवन की बगिया मेरी तुम्हीं संवारना सजन प्यासी धरती जैसी मैं हूँ तू घटा घनघोर बने ---- नीरु ( निरुपमा मििश्रा त्रिवेदी )

बंद कमरे

Image
अंधेरे बंद कमरे कोने में दुबके-से हैं दिन, जिन्हें नसीब नही होता मुँह देखना कभी रोशनी का, हर मकान की खिड़कियां ,दरवाजे बंद हैं इस डर से कि रास्ते का सूरज उनके अंधेरों का राज़ न जान ले, छुपाते एक दूसरे से ग़म और खुशी डरती है आने से होंठों पर हँसी, रोशनदान तक में स्वार्थ का पर्दा पड़ा, अब तो जो कभी - कभार आ जाया करती थीं हवायें आकर लौट जाती, पता नही कैसे जी लेती साँसें घुटन भरे बंद कमरों में , क्यों खो जाती वो ताकत जो सामना करती एक दूसरे का, समेटकर बिखरती रोशनी अपने दिनों के दामन भरकर अब जी लेते हैं हम अपनी साँसें खुली फिजाओं में ---- नीरु 'निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी' 

प्रश्नचिन्ह

Image
तुम्हारी देहरी पर रखा दीपक प्रतीक्षा में रहा वर्षों तलक, कब दोगे विश्वास से भीगी स्नेह की बाती, एक दिन अचानक नेह के आशीष से भिगोई आँसुओं में बाती, अपनेपन की लौ में जिंदगी ल...

प्रतिफल

Image
अंधेरी रात की टहनी पर अटका चाँद सोचता है, क्यों आग उगलती किरणें सूरज की पहले से भी अधिक , बादल अपनी समय सीमा से इतर भटकते कहाँ पर, कहाँ वो सुबह -शाम चहचहाना चिड़ियों का, हरी-भरी ...

ख्वाबों में बुला लेना मुझे

Image
याद आये अगर ख्वाबों में बुला लेना मुझे खुशबू जैसी हूँ साँसों में बसा लेना मुझे रहे चाहत जब भी कुछ गुनगुनाने की रहे हसरत जब भी सब भूल जाने की गीत  के आँगन में सुरों से सजा लेना ...