किससे कहें

सह रहे हम चुपचाप क्यों, बयान किससे कहें
क्यों खोया सुकून, जिस्म बेजान किससे कहें
दहशतों-नफ़रतों का आखिरी अंजाम दर्द
यहाँ  इंसान हो रहा हैवान किससे कहें 
---- नीरु (निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी)

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