मन के बोल पर
जब जिंदगी
गहरे भाव संजोती है,
विह्वल होकर लेखनी
कहीं कोई
संवेदना पिरोती है,
तुम भी आ जाना
इसी गुलशन में
खुशियों को सजाना
है मुझे,
अभी तो अपनेआप को
तुझमें
पाना है मुझे
चेहरे
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
नकाबों में छुपे हैं चेहरे कितने
झूठे थे ख्वाब जो, वो सुनहरे कितने
निगाहें भी निगेहबां भी हमारे वो
दिखाये अक्स जो, वो दोहरे कितने
अपने बच्चों की सफल परवरिश के सूत्र सीखिए भगवान शिव और माँ पार्वती से, बच्चों के लिए अपनाएं ये चार नियम...आज महा शिवरात्रि पर विशेष। बच्चों के अच्छे और उज्जवल भविष्य के लिए सही परवरिश बेहद जरूरी है। खासकर आज के दौर में बच्चों की सही परवरिश एक मजबूत भविष्य में अहम भूमिका निभाती है। हमें देवी-देवताओं और हमारे भगवान - भगवती से भी पेरेंटिंग से जुड़ी जरूरी बातें हमें सीखने को मिलती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती इन्हीं में से एक हैं, जो एक आदर्श माता-पिता के उदाहरण हैं। आज शिवरात्रि के मौके पर हम जानेंगे कैसे शिव-शक्ति सिखाते हैं पेरेंटिंग का सटीक तरीका- हर बच्चे की अपनी खासियत होती है शिव और पार्वती के पुत्र भगवान गणेश और कार्तिकेय, दोनों एक ही माता-पिता की संतान हैं, लेकिन दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग है। जहां गणेश जी धैर्यवान और बुद्धिमान हैं, तो वहीं कार्तिकेय जी ऊर्जावान और प्रतिस्पर्धी हैं। फिर भी शिव-पार्वती ने कभी अपने बच्चों की तुलना नहीं की। इसी तरह हमें भी माता-पिता के रूप में अपने बच्चों की तुलना बंद करके उनकी अपनी खूबियों को निखारना ...
अध्यात्म की भाषा में यदि कहा जाये तो मृत्यु के पश्चात् वीतरागी आत्मा संसार से मुक्त होकर ईश्वरीय शक्ति के स्वरुप में समाहित हो जाती है किन्तु राग-विराग , मोह-माया , दु:ख -सुख, वैमनस्य आदि अनेक प्रकार की इच्छाओं- आकांक्षाओं के वशीभूत होकर पुनर्जन्म के माध्यम से अपनी काम्य वस्तुओं एवं प्रिय लोगों के चतुर्दिक् अपने नवजीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों की तलाश करती है | यह प्रश्न सदैव शाश्वत रहा है कि क्या पितृपक्ष में हमारे पूर्वजों को जो कि भौतिक शरीर को त्याग चुके हैं , उन्हें सम्पत्ति , भोजन, कपड़ों आदि की आवश्यकता होती होगी, यदि मृत देह से विमुक्त स्वतंत्र विचरित आत्मा को समय और स्थान से परे कहीं दूर किसी नवीन आयाम में रहना सुनिश्चित है तो वंशजों द्वारा श्रृद्धापूर्वक भावअर्पण के विभिन्न उपादानों एवं क्रियाकलापों से प्रसन्नता तो जरुर मिलती होगी| पितृ-ऋण से मुक्ति के विधान के लिए विवाह-संस्कार की रीति निर्धारित की गई है , यहां पर गौरतलब है कि विवाह की रीति निभाने के लिए पहले पांच तत्वों से निर्मित भौतिक शरीर में उपस्थित ...
💓 डिप्रेशन की मानसिक समस्या से छुटकारा पाने की अनमोल टिप्स 💓 🎯 खुद को सदा व्यस्त रखे...। खुद को हलके फुल्के कार्यो में बिजी कर दे जिससे आपका मनोरंजन हो और आपको ख़ुशी मिले। जैसे की कोई स्पोर्ट गेम ,अपनी रूचि के अनुसार धार्मिक ,सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले। 🎯 अपना लक्ष्य निर्धारित करे...। डिप्रेशन का एक कारण सही वक्त पर लक्ष्य पूरे नहीं होना भी होता है। इससे बचने के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित करे, बड़े बड़े कार्यो को छोटे छोटे हिस्से में बांटे , कुछ काम की प्राथमिकता निर्धारित करे और ऐसा काम करे जिसकी आपमे पूरी क्षमता हो। 🎯 सामाजिक रूप से सक्रिय हो। आप अपने करीबी लोगो के साथ समय बिताये। किसी भरोसेमंद दोस्त या रिश्तेदार को अपनी गुप्त बातें बताये। अपने आप को सबसे अलग करने की कोशिश न करे और दूसरो को अपनी हेल्प करने दे। 🎯 राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने से सकारात्मक विचारों को बल मिलता है। पॉवरफुल मेडिटेशन से मन शांत रहता है और मेन्टल स्टेट मेन्टेन रहती है। हो सके तो थोड़ी देर खुली हवा में टहले । प्रकृति का प्रभाव हमारे मन और तन दोनों पर पड़ता है...
Comments