मन की पीड़ा झुठलाई



 दिवंगत पूज्यनीय पिता जी को अश्रुपूरित श्रृद्धांजलि....🙏

मोहक सरल छवि आपकी सागर सी गहराई।
व्यक्तित्व गगन के जैसा धरती सम करुणा पाई।

साहस का पर्याय आप थे संघर्षों से भरा था जीवन,
ममता की मूरत थे हरदम निर्मल निश्छल था अंतर्मन,
मधुर बोल की औषधि से मन की पीड़ा झुठलाई।

पथ प्रदर्शक आशा ज्योति जीवन भर ही कर्म रहा,
सुख दुख में समदर्शी थे परोपकारी मर्म रहा,
जीवन अनमोल धरोहर बात हमेशा सिखलाई।

सखा पिता बेटा भाई पति रूप अनूप आपके,
सदगुणों के महासागर उत्तम इंसान आप थे,
धन्य भाग्य मेरे मै जो सुता आपकी कहलाई।

निरुपमा मिश्रा 'नीरू''

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